मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के मायने
पिछले 3 सालों से अगर देखें तो मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में एक बात बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्तमान पार्टी नेताओं पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है पिछले प्रत्येक मंत्रिमंडल विस्तार में एक बात जो कॉमन रही है वह यह है कि भाजपा में ऐसा लगता है कि नेताओं की कमी सी हो गई है क्योंकि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में या इस मंत्रिमंडल विस्तार में अगर देखें तो आपको पता चल जाएगा कि किस तरह से बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए भी बाहरी लोग मंत्री बनाए गए और भाजपा के छह छह बार के सांसद मंत्री पद की लालसा लिए रह गए यह नरेंद्र मोदी की न्यू इंडिया की स्टाइल है मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनाए गए आर के सिंह हो हरदीप पुरी हूं या फिर अल्फांसो कन्नन तीनों के पास कोई खास राजनीतिक अनुभव नहीं है लेकिन फिर भी उन्हें मंत्री बनाया गया वही सरकार में काम कर रहे राजीव प्रताप रूडी और बंडारू दत्तात्रेय जैसे सीनियर नेताओं को हटाया गया राजीव प्रताप रूडी एविएशन फील्ड के मास्टर है लेकिन लेकिन सरकार उनका पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाई और उन्हें कम महत्व के मंत्रालयों में भेजकर और बाद में काम ना करने का आरोप लगाकर मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया जबकि जानकार बताते हैं कि राजीव प्रताप रूडी एक बेहद लगनशील व्यक्तित्व है वही गिरिराज सिंह जैसे एक बेहद विवादास्पद मंत्री का पद बिना काम किए भी बरकरार रह गया और तरक्की भी पा गया इससे स्पष्ट है की सरकार में वही लोग काम करेंगे जीन की भूमिका विवादास्पद हो और वे ध्रुवीकरण की राजनीति कर सकें
पिछले 3 सालों से अगर देखें तो मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में एक बात बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्तमान पार्टी नेताओं पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है पिछले प्रत्येक मंत्रिमंडल विस्तार में एक बात जो कॉमन रही है वह यह है कि भाजपा में ऐसा लगता है कि नेताओं की कमी सी हो गई है क्योंकि पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में या इस मंत्रिमंडल विस्तार में अगर देखें तो आपको पता चल जाएगा कि किस तरह से बिना किसी सदन के सदस्य होते हुए भी बाहरी लोग मंत्री बनाए गए और भाजपा के छह छह बार के सांसद मंत्री पद की लालसा लिए रह गए यह नरेंद्र मोदी की न्यू इंडिया की स्टाइल है मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनाए गए आर के सिंह हो हरदीप पुरी हूं या फिर अल्फांसो कन्नन तीनों के पास कोई खास राजनीतिक अनुभव नहीं है लेकिन फिर भी उन्हें मंत्री बनाया गया वही सरकार में काम कर रहे राजीव प्रताप रूडी और बंडारू दत्तात्रेय जैसे सीनियर नेताओं को हटाया गया राजीव प्रताप रूडी एविएशन फील्ड के मास्टर है लेकिन लेकिन सरकार उनका पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाई और उन्हें कम महत्व के मंत्रालयों में भेजकर और बाद में काम ना करने का आरोप लगाकर मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया जबकि जानकार बताते हैं कि राजीव प्रताप रूडी एक बेहद लगनशील व्यक्तित्व है वही गिरिराज सिंह जैसे एक बेहद विवादास्पद मंत्री का पद बिना काम किए भी बरकरार रह गया और तरक्की भी पा गया इससे स्पष्ट है की सरकार में वही लोग काम करेंगे जीन की भूमिका विवादास्पद हो और वे ध्रुवीकरण की राजनीति कर सकें
बहुत खुब
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